भर राजा इन्द्र। 11 वी
सदी इन्द्रपुर भीरा, स्वसी, मऊ, जनपद मऊ के तहसील वैसी के द्छिन पश्चिम दिशा में घोसी से मुहम्मदाबाद मार्ग पर सीवटी तिराहा और सीतात्मक से फेटी मार्ग पर रेतीरिडिह के आगे फत्तेपुर की जा रही सड़क के किनारे छोटी सरजू नदी है। । दाढ़ी तट पर स्थित हैं। भीरा स्थित हैं। इन्द्रपुर के पश्चिम ँद्वापट्टी दक्छिन फत्तेपुर ताल, पूरब भैरोपुर और उत्तर छोटी नदी सरजू स्थित है। इन्द्रपुर भीरा 10 वी सदी से 14 वी सदी के मध्य कालका शासन रहा है। इन्द्रपुर भी प्राचीन काल से ही कृषि की राजधनी रही है। संत का इन्द्रपुर भीरा नामक उसला लगभग 30 एकड़ भूभाग पर विस्तृत था। इसकी स्थापना भर राजा इन्द्र ने 10 वी से 11 वी सदी के मध्य किया था। इन्होनेन्डर्ट्स के चतुर्दिक नगर रिसॉर्ट्स । का निर्माण किया गया था। भर राजा इन्द्र के नाम पर ही इस स्थान का नाम इन्द्रपूर पड़ा। कलानार में इसका नाम भीरमतीह पड़ा। भीरतीस के पूर्वाब में चेरूओ का शासन था। इस किले पर कभी भर राजा वसश का भी शासन रहा है। इस किले के चतुर्दिक क्षेत्र में भर, रज्भरौ की बहुलता है। यद्यपि यह उसला विभाग द्वारा संरक्षित है, फिर भी इस किले पर खेती हो रही है। इस किले के ध्वंससेश में कुशनाला और गुप्त कालीन भग्नावशेष मिले हैं। । संदर्भ ग्रंथ। पासी वंश पृष्ठ 31,32,33, लेखक राज कुमार पासी। सबसे दुःखद स्थिति यह है कि 10 वी से 14 वी सदी तक यहाँ पर काम का शासन रहा है। हालांकि संस्थापक भर शासक और भर राजा घोष के अलवा अन्य भर शासको का जिक्र किसी भी ग्रंथ में नहींँ किया गया है। यह शोध का विषय है। rcrao
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